
पटना। बिहार में बाढ़ का संकट लगातार गंभीर बना हुआ है। राज्य की कई प्रमुख नदियां अब भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, जिसके चलते 15 जिलों में जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। आपदा प्रबंधन विभाग के बुधवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में करीब 50.49 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। वहीं 15 जिलों की 576 ग्राम पंचायतों में बाढ़ का पानी फैल गया है।
बाढ़ प्रभावित इलाकों में लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने और जरूरतमंदों को भोजन तथा चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए प्रशासन की ओर से राहत एवं बचाव अभियान जारी है। कई इलाकों में सड़क संपर्क प्रभावित होने के कारण नावों के जरिए लोगों तक राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है। नदियों के जलस्तर में लगातार उतार-चढ़ाव के बीच प्रशासन की नजर संवेदनशील इलाकों पर बनी हुई है।
15 जिलों में बाढ़ का असर
आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार बाढ़ का असर पटना, भोजपुर, बक्सर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय, खगड़िया, पूर्णिया, मधेपुरा और अरवल में है। इन जिलों के कई प्रखंडों और ग्राम पंचायतों में पानी फैलने से सामान्य गतिविधियां प्रभावित हुई हैं।
बाढ़ के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन, खेती और रोजमर्रा की गतिविधियों पर असर पड़ा है। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई परिवार सुरक्षित स्थानों या राहत शिविरों में पहुंचाए गए हैं।
कोसी और गंगा का जलस्तर खतरे के ऊपर
राज्य में बाढ़ की स्थिति को गंभीर बनाने वाली प्रमुख वजहों में नदियों का बढ़ा हुआ जलस्तर भी शामिल है। केंद्रीय जल आयोग के आंकड़ों के अनुसार कोसी नदी बलतारा और कुरसेला में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। वहीं गंगा नदी कहलगांव में खतरे के निशान से ऊपर है। बिहार सरकार के बाढ़ पूर्वानुमान आंकड़ों में भी 23 सितंबर को बलतारा, कुरसेला और कहलगांव समेत कई स्थानों पर नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर दर्ज किया गया।
इसके अलावा राज्य के कुछ अन्य हिस्सों में भी नदियों का जलस्तर चेतावनी स्तर से ऊपर बना हुआ है। इससे निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ी हुई है। प्रशासन लगातार जलस्तर और तटबंधों की स्थिति पर निगरानी रख रहा है।
राहत शिविरों में हजारों लोगों को ठिकाना
बाढ़ के कारण विस्थापित हुए लोगों के लिए राज्य में राहत शिविर चलाए जा रहे हैं। बुधवार की जानकारी के मुताबिक, छह राहत शिविरों में 7,714 लोगों को आश्रय दिया गया है। इन शिविरों में लोगों को भोजन और चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। इसके अलावा बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए तीन सामुदायिक रसोई भी संचालित की जा रही हैं। इन रसोइयों के जरिए अब तक करीब 1.96 करोड़ भोजन उपलब्ध कराए जाने की जानकारी दी गई है।
प्रशासन का प्रयास है कि बाढ़ प्रभावित परिवारों तक जरूरी खाद्य सामग्री और दूसरी आवश्यक वस्तुएं समय पर पहुंचाई जाएं। जिन इलाकों में पानी अधिक है, वहां नावों की मदद से राहत और बचाव अभियान चलाया जा रहा है।
NDRF और SDRF की टीमें तैनात
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव अभियान के लिए बड़ी संख्या में आपदा प्रबंधन दल तैनात किए गए हैं। अधिकारियों के अनुसार 27 एसडीआरएफ और 8 एनडीआरएफ टीमें राहत एवं बचाव कार्य में लगी हुई हैं। प्रभावित क्षेत्रों में 391 नावों को भी अभियान में लगाया गया है।
इन टीमों के जरिए जलभराव वाले क्षेत्रों से लोगों को निकालने, उन्हें सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने और जरूरत के मुताबिक राहत सामग्री उपलब्ध कराने का काम किया जा रहा है। प्रशासन की ओर से लोगों से भी जलमग्न इलाकों में अनावश्यक रूप से जाने से बचने की अपील की जा रही है।
बारिश को लेकर भी अलर्ट
बिहार में मौजूदा बाढ़ की स्थिति के बीच मौसम विभाग ने भी अगले कुछ दिनों के लिए बारिश का पूर्वानुमान जारी किया है। मौसम विभाग के अनुसार 23 से 26 सितंबर के बीच राज्य के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है, जबकि कुछ स्थानों पर भारी बारिश की संभावना है।
राज्य में 1 जून से अब तक कुल 661.9 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है। हालांकि मौसम विभाग के मुताबिक, यह सामान्य से करीब 29 प्रतिशत कम है। इसके बावजूद कुछ क्षेत्रों में हुई बारिश और नदियों के बढ़े जलस्तर ने बाढ़ की स्थिति को गंभीर बनाए रखा है।
पहले भी बढ़ता गया प्रभावितों का आंकड़ा
बिहार में इस साल बाढ़ की स्थिति पिछले कुछ सप्ताह से लगातार बदलती रही है। सितंबर की शुरुआत में प्रभावित लोगों की संख्या करीब 43 लाख थी, जो बाद में बढ़कर 46 लाख से ज्यादा हुई और अब 50.49 लाख तक पहुंच गई है। इससे पता चलता है कि बाढ़ का दायरा लगातार बढ़ा है और नए इलाकों में पानी फैलने से प्रभावित आबादी का आंकड़ा भी बढ़ा है।
फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना, राहत शिविरों में आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना और बाढ़ के पानी से घिरे इलाकों में भोजन व चिकित्सा सहायता पहुंचाना है। वहीं नदियों के जलस्तर और मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। आने वाले दिनों में बारिश और नदियों के जलस्तर में होने वाला बदलाव बिहार के बाढ़ प्रभावित इलाकों के लिए अहम रहेगा।





